यूपी में भारी बारिश का कहर: 21 जिलों में अलर्ट, नदियां उफान पर; स्कूल बंद


Pachperwa News | उत्तर प्रदेश मौसम अपडेट

उत्तर प्रदेश में मानसून की सक्रियता अब कई इलाकों में परेशानी का कारण बनती जा रही है। लगातार हो रही बारिश के चलते प्रदेश के कई जिलों में नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है और कुछ स्थानों पर बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। कई जगह कच्चे मकान और दीवारें गिरने से जनहानि की भी खबर सामने आई है।

मौसम विभाग ने प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश और गरज-चमक के साथ वज्रपात की आशंका जताई है। 21 जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। वहीं कुछ जिलों में हालात को देखते हुए स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है।

बारिश से अवध में चार लोगों की मौत

लगातार बारिश के बीच अवध क्षेत्र में अलग-अलग हादसों में चार लोगों की जान चली गई। सीतापुर के कमलापुर में कच्ची दीवार गिरने से नेकराम और उनकी बेटी लक्ष्मी की मौत हो गई। अमेठी के बाजार शुकुल क्षेत्र में भी दीवार गिरने से सात वर्षीय बच्ची की जान चली गई।

रायबरेली के जगतपुर क्षेत्र में दीवार गिरने से अवधेश मौर्य की मौत की जानकारी सामने आई है।

बारिश के कारण कई जिलों में कच्चे मकानों और जर्जर निर्माणों को लेकर खतरा बढ़ गया है। प्रशासन की ओर से लोगों से बारिश के दौरान पुराने और कमजोर भवनों से सावधानी बरतने की अपील की जा रही है।

ऊंचाहार एनटीपीसी की यूनिट भी प्रभावित

लगातार बारिश और जलभराव का असर रायबरेली की ऊंचाहार एनटीपीसी परियोजना पर भी पड़ा है। जलभराव की स्थिति के चलते चार नंबर यूनिट को बंद करना पड़ा। इससे पहले दो नंबर यूनिट भी बंद हो चुकी थी, जबकि पांचवीं यूनिट पहले से अनुरक्षण कार्य के लिए बंद बताई गई है।

इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि लगातार बारिश का असर केवल जनजीवन पर ही नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण संस्थानों और बुनियादी ढांचे पर भी पड़ रहा है।

बांदा और प्रयागराज में बारिश ने बनाया रिकॉर्ड

इस मानसूनी दौर में उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बारिश ने पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। अगस्त महीने में प्रयागराज में 631.6 मिमी और बांदा में 646 मिमी बारिश दर्ज की गई।

इन दोनों जिलों में अगस्त के दौरान इतनी बारिश वर्ष 1901 के बाद पहले कभी दर्ज नहीं होने की जानकारी दी गई है। हमीरपुर, महोबा और चित्रकूट में भी बारिश का असर काफी ज्यादा रहा।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने लगातार निम्न दबाव वाले क्षेत्रों के कारण अगस्त में मानसून सक्रिय बना रहा।

कई नदियां खतरे के निशान के ऊपर

बारिश के कारण प्रदेश की प्रमुख नदियों में जलस्तर बढ़ रहा है। गंगा, गोमती, सरयू और मंदाकिनी समेत कई नदियों के किनारे बसे इलाकों में प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ रही है।

चित्रकूट में मंदाकिनी का जलस्तर बढ़ा

चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से कई मीटर ऊपर पहुंचने की जानकारी सामने आई है। इसके चलते रामघाट क्षेत्र में पानी भर गया और नदी किनारे स्थित दुकानों, मकानों, आश्रमों और होटलों पर भी असर पड़ा।

अवध में सरयू का बढ़ा दबाव

बहराइच में सरयू नदी खतरे के निशान को पार कर गई है। गोंडा में भी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बताया गया है। अंबेडकरनगर और बाराबंकी में भी जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे के क्षेत्रों में चिंता बढ़ी है।

अयोध्या में सरयू का जलस्तर बढ़ने से रामघाट क्षेत्र में अंतिम संस्कार जैसी सामान्य गतिविधियां भी प्रभावित होने की बात सामने आई है।

कानपुर और पूर्वांचल में भी बाढ़ जैसे हालात

कानपुर में पांडु नदी का जलस्तर बढ़ने से दक्षिणी हिस्से के कुछ मोहल्लों में पानी घरों तक पहुंच गया। इससे हजारों लोगों के प्रभावित होने की जानकारी है और कुछ परिवार सुरक्षित स्थानों की ओर चले गए हैं।

पूर्वांचल में सोनभद्र, चंदौली और मिर्जापुर में बांधों से पानी छोड़े जाने के कारण छोटी नदियों का जलस्तर भी बढ़ा है।

बलिया में गंगा का पानी कई घरों तक पहुंचने की खबर है, जबकि चंदौली के कई गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है। गाजीपुर में भी प्रमुख मार्गों पर बाढ़ का पानी भरने से आवागमन प्रभावित हुआ।

बुंदेलखंड के बांधों में बढ़ा पानी

झांसी, ललितपुर, चित्रकूट और महोबा समेत बुंदेलखंड के कई इलाकों में बांधों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। क्षेत्र के अधिकांश प्रमुख बांध अपनी क्षमता के काफी करीब पहुंच चुके हैं।

ऐसे में प्रशासन और सिंचाई विभाग की ओर से जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है, क्योंकि अधिक बारिश होने पर निचले इलाकों में पानी छोड़ने की स्थिति बन सकती है।

इन 21 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग की ओर से जिन क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है, उनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, प्रयागराज, फतेहपुर, सोनभद्र, मिर्जापुर, कानपुर देहात, कानपुर नगर, रायबरेली, मथुरा, हाथरस, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, औरैया, जालौन, हमीरपुर, महोबा, झांसी और ललितपुर।

इन क्षेत्रों के आसपास के इलाकों में भी मौसम को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है।

इन इलाकों में वज्रपात का खतरा

बारिश के साथ कई जिलों में गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका भी जताई गई है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़, गौतमबुद्ध नगर और बुलंदशहर से लेकर आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा औरैया, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, संभल और बदायूं तक कई क्षेत्र इसकी चपेट में आ सकते हैं।

बुंदेलखंड के जालौन, हमीरपुर, महोबा, झांसी और ललितपुर में भी वज्रपात को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है।

सितंबर में कैसा रहेगा यूपी का मौसम?

मौसम के मासिक अनुमान के मुताबिक सितंबर में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का पैटर्न अलग रह सकता है। पश्चिमी यूपी के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश की संभावना जताई गई है, जबकि दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है।

मध्य और दक्षिणी हिस्सों में सामान्य बारिश की संभावना है। साथ ही प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में तापमान सामान्य से अधिक रहने का अनुमान बताया गया है।

लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

भारी बारिश और वज्रपात की स्थिति में लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। नदी, नाले और जलभराव वाले क्षेत्रों के पास जाने से बचें। आकाशीय बिजली के दौरान खुले मैदान, पेड़ या बिजली के खंभों के नीचे खड़े न हों।

जिन इलाकों में प्रशासन ने स्कूल बंद करने या आवागमन को लेकर निर्देश जारी किए हैं, वहां स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करना जरूरी है।

Pachperwa News का निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश में मानसून इस समय कई क्षेत्रों में सक्रिय है और इसका असर नदियों के जलस्तर से लेकर सड़क, बिजली और सामान्य जनजीवन तक दिखाई दे रहा है। बलरामपुर समेत नेपाल सीमा से जुड़े जिलों के लोगों के लिए भी नदी और बारिश की स्थिति पर नजर रखना जरूरी है। हालांकि किसी भी इलाके में बाढ़ की स्थिति को लेकर केवल आधिकारिक प्रशासनिक सूचना पर ही भरोसा करें।

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