बलरामपुर। अपनी आय से संसाधन जुटाने वाली ग्राम पंचायतों के लिए अच्छी खबर है। जिले में स्वयं के स्रोतों से कमाई करने वाली पंचायतों को विकास कार्यों के लिए पंचायत प्रतिपूर्ति एवं प्रोत्साहन योजना के तहत अतिरिक्त धनराशि देने की तैयारी है। योजना के अनुसार, 1,500 तक की आबादी वाली पात्र पंचायतों को उनकी आय के पांच गुना तक प्रोत्साहन बजट दिया जाएगा।
इसके लिए ग्राम्य विकास विभाग ने जिले की ऐसी पंचायतों की जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो वित्तीय वर्ष 2025-26 में अपने संसाधनों से आय अर्जित कर रही हैं।
किन पंचायतों को मिलेगा प्रोत्साहन?
योजना के तहत उन ग्राम पंचायतों को शामिल किया जाएगा, जो अपने स्तर पर आय के स्रोत विकसित कर रही हैं। इनमें जन सेवा केंद्र, कूड़ा संग्रहण, खाद बिक्री, कूड़ा निस्तारण केंद्र (आरआरसी), जल शुल्क और तालाब पट्टे की नीलामी जैसे स्रोतों से होने वाली कमाई शामिल है।
ऐसी पंचायतों की सूची तैयार करने के लिए सभी सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को पत्र जारी किया गया है। इसके बाद जिला स्तरीय समिति प्राप्त जानकारी का सत्यापन करेगी और पात्र ग्राम पंचायतों का चयन किया जाएगा।
1,500 तक आबादी वाली पंचायतों पर विशेष जोर
बलरामपुर जिले में कुल 793 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें 157 पंचायतें ऐसी हैं, जिनकी आबादी 1,500 तक है। योजना का उद्देश्य छोटी पंचायतों को अपने संसाधनों से आय अर्जित करने के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि वे विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त धनराशि जुटा सकें।
योजना के तहत पात्र पंचायतों को उनकी स्वयं की आय के आधार पर प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। यानी पंचायत जितनी आय अपने स्रोतों से अर्जित करेगी, उसके अनुपात में उसे अतिरिक्त बजट मिलने की संभावना होगी।
पिछले वर्ष तीन पंचायतों को मिला था लाभ
विभाग के अनुसार, पिछले वर्ष बलरामपुर की तीन ग्राम पंचायतों को इस योजना का लाभ मिल चुका है। इनमें विकासखंड गैंडासबुजुर्ग की धौराहरा, पचपेड़वा की मिश्ररौलिया और श्रीदत्तगंज की त्रिगुनायकपुर ग्राम पंचायत शामिल हैं।
अब इसी तर्ज पर वित्तीय वर्ष 2025-26 में अपने संसाधनों से आय अर्जित करने वाली पंचायतों की सूची तैयार की जा रही है।
क्या है पंचायत प्रतिपूर्ति एवं प्रोत्साहन योजना?
यह योजना ग्राम पंचायतों को केवल सरकारी अनुदान पर निर्भर रहने के बजाय अपने संसाधनों से आय बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करती है। इसके तहत पंचायतों को उनकी ओन सोर्स रेवेन्यू (OSR) यानी स्वयं की आय के आधार पर प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
विभाग के अनुसार, यह सामान्य योजना मद की धनराशि नहीं, बल्कि पंचायतों की कमाई के आधार पर दिया जाने वाला प्रोत्साहन पुरस्कार है। इसका उद्देश्य पंचायतों में वित्तीय आत्मनिर्भरता और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग की सोच को बढ़ावा देना है।
आगे क्या होगी प्रक्रिया?
सहायक विकास अधिकारियों से प्राप्त सूची के बाद जिला स्तरीय समिति पंचायतों की आय और पात्रता का सत्यापन करेगी। इसके बाद चयनित पंचायतों को योजना के तहत प्रोत्साहन राशि दिए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
इस पहल से गांवों में स्थानीय संसाधनों के उपयोग, आय बढ़ाने और विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त धन जुटाने को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
