बलरामपुर। जिले की गैसड़ी विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक राकेश कुमार यादव और एक अनुसूचित जाति की महिला के बीच भूमि विवाद का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। महिला ने विधायक और उनके भाई पर पैतृक भूमि पर अवैध कब्जा करने का आरोप लगाया है, जबकि विधायक ने सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए मामले को पुराना राजस्व विवाद करार दिया है।
क्या है पूरा मामला?
कोतवाली देहात क्षेत्र के धूसाह गांव निवासी संघमित्रा गौतम ने प्रशासन को दिए गए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि चर्च रोड स्थित उनकी पैतृक भूमि (गाटा संख्या 765, रकबा 0.055 हेक्टेयर) पर विधायक पक्ष द्वारा अवैध रूप से कब्जा किया गया है।
महिला का कहना है कि जमीन पर पहले मिट्टी डलवाई गई और बाद में वहां बाउंड्रीवाल तथा मुख्य गेट का निर्माण करा दिया गया। उनका दावा है कि भूमि स्वामित्व और सीमांकन को लेकर पूर्व में कई बार सुनवाई हो चुकी है तथा उनकी ओर से की गई आपत्तियां भी खारिज हो चुकी हैं, इसके बावजूद कथित रूप से कब्जे की कार्रवाई की गई।
विरोध करने पर धमकी देने का आरोप
संघमित्रा गौतम ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने निर्माण कार्य का विरोध किया तो उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें जातिसूचक शब्द कहकर अपमानित किया गया तथा जान से मारने की धमकी दी गई।
महिला का आरोप है कि प्रभावशाली लोगों के दबाव के कारण मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की अभी तक किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं हुई है।
सीमांकन प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल
महिला के अनुसार, भूमि विवाद से जुड़े मामले विभिन्न राजस्व न्यायालयों में लंबित रहे हैं और दोबारा सीमांकन की प्रक्रिया प्रस्तावित थी। उनका कहना है कि अप्रैल 2025 के बाद सीमांकन की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी, जबकि इसी दौरान विवादित भूमि पर निर्माण कार्य करा लिया गया।
उन्होंने संबंधित राजस्व अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
अधिकारियों पर दबाव बनाने का आरोप
संघमित्रा गौतम ने कुछ अधिकारियों पर दबाव बनाकर समझौता कराने का प्रयास करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उन्हें भूमि छोड़ने और बदले में मुआवजा लेने की सलाह दी गई।
महिला ने यह भी दावा किया कि उन्होंने मामले को लेकर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जहां से पुलिस अधीक्षक को निगरानी के निर्देश दिए गए थे। इसके साथ ही उन्होंने अपनी सहमति के बिना सुलहनामा दाखिल किए जाने का भी आरोप लगाया है।
विधायक राकेश यादव ने क्या कहा?
वहीं गैसड़ी विधायक राकेश कुमार यादव ने महिला द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि संबंधित भूमि की कई बार पैमाइश हो चुकी है और उसके सभी अभिलेख उपलब्ध हैं।
विधायक का कहना है कि महिला लंबे समय से भूमि को लेकर आपत्ति दर्ज कराती रही हैं। उन्होंने कहा कि जमीन जहां स्थित है, वहीं पर उन्हें उपलब्ध कराई जा सकती है और यदि आवश्यकता हुई तो जिन लोगों से भूमि खरीदी गई है, उनसे भी जानकारी ली जा सकती है।
उन्होंने मामले के समाधान में पूरा सहयोग देने का भरोसा भी जताया।
प्रशासनिक जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई
भूमि विवाद और लगाए गए आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच और राजस्व अभिलेखों की जांच पर टिकी हुई है। महिला ने भूमि का निष्पक्ष सीमांकन कराने, कथित कब्जा हटवाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
वहीं विधायक द्वारा आरोपों को खारिज किए जाने के बाद यह मामला प्रशासनिक और कानूनी जांच का विषय बन गया है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
प्रमुख बिंदु
🔹 दलित महिला ने विधायक और उनके भाई पर जमीन कब्जाने का आरोप लगाया।
🔹 चर्च रोड स्थित पैतृक भूमि पर बाउंड्रीवाल और गेट निर्माण का दावा।
🔹 विरोध करने पर धमकी और अभद्रता का आरोप।
🔹 विधायक राकेश यादव ने सभी आरोपों को निराधार बताया।
🔹 भूमि की कई बार पैमाइश होने का दावा।
🔹 निष्पक्ष सीमांकन और जांच की मांग तेज।
नोट: यह समाचार दोनों पक्षों द्वारा दिए गए बयानों पर आधारित है। मामले में अंतिम निष्कर्ष संबंधित प्रशासनिक जांच, राजस्व अभिलेखों और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।
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